Transliteration: (Afatatma'oona ai yu'minoo lakum wa qad kaana fareequm minhum yasma'oona Kalaamal laahi summa yuharri foonahoo mim ba'di maa'aqaloohu wa hum ya'lamoon)
इलाही किताबों में जानबूझकर फेरबदल:
यह आयत यहूदियों के उन आलिमों और रहबानों की तरफ इशारा करती है जो तौरेत और इंजील के जानकार थे। वे जानते थे कि इन किताबों में रसूल अल्लाह ﷺ की पहचान और खूबियाँ लिखी गई हैं। फिर भी उन्होंने इन्हें छिपाया या बदल दिया। यह आयत चेतावनी देती है कि जो लोग अल्लाह की किताबों में जानबूझकर बदलाव कर सकते हैं, उनसे यह उम्मीद करना कि वे सच्चाई को अपनाएँगे—यह ग़लत सोच है।
इसलिए मुसलमानों को सतर्क रहना चाहिए कि ऐसे लोग उनके विचारों में भी ग़लतियाँ ना पैदा कर दें, जैसे उन्होंने अपनी किताबों में किया।
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