कुरान - 2:73 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
فَقُلۡنَا ٱضۡرِبُوهُ بِبَعۡضِهَاۚ كَذَٰلِكَ يُحۡيِ ٱللَّهُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Faqulnad riboohu biba'dihaa; kazaalika yuhyil laa hul mawtaa wa yureekum aayaatihee la'allakum ta'qiloon)

[73] तब हमने कहा: “उसे (यानी मरे हुए आदमी को) उसके एक हिस्से (गाय के) से मारो।” इस तरह अल्लाह मरे हुओं को ज़िंदा करता है और तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है ताकि तुम समझ सको। [132] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[132]

ज़िंदगी और मौत पर अल्लाह का क़ुदरती कंट्रोल:
इस आयत में अल्लाह ने एक मुजीज़ा (चमत्कार) दिखाया — मरा हुआ आदमी एक क़ुरबानी की गई गाय के टुकड़े से ज़िंदा कर दिया गया। इससे यह साबित होता है कि अल्लाह मरने के बाद भी ज़िंदा कर सकता है।

इसका मक़सद सिर्फ क़ातिल को बेनकाब करना नहीं था, बल्कि बनी इसराईल के दिलों में यक़ीन पैदा करना था कि अल्लाह ही ज़िंदगी और मौत का मालिक है।

यह निशानियाँ इस लिए दिखाई जाती हैं ताकि लोग सोचें-समझें और आख़िरत (परलोक) की हक़ीक़त को जान सकें।

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