Transliteration: (Wa izaa laqul lazeena aamanoo qaalooo aamannaa wa izaakhalaa ba'duhum ilaa ba'din qaalooo atuhaddisoonahum bimaa fatahal laahu 'alaikum liyuhaajjookum bihee 'inda rabbikum; afalaa ta'qiloon)
यहूदियों की मुनाफ़िक़त और सच्चाई को छिपाना:
इस आयत में उन यहूदियों का ज़िक्र है जो मुसलमानों से मिलकर कहते थे कि वे भी ईमान लाए हैं, लेकिन अकेले में अपने आलिमों और रहबानों से यह सुनते थे कि: "तुम मुसलमानों को अल्लाह की किताब की वह बातें क्यों बताते हो जो हमने सीखी हैं? अगर तुमने उन्हें बता दिया, तो वे क़यामत के दिन तुम्हारे ख़िलाफ़ अल्लाह से तर्क करेंगे।"
इससे उनकी मुनाफ़िक़त और सच्चाई को जानबूझकर छिपाने का रवैया सामने आता है। वे अल्लाह की नाज़िल की गई बातों को पहचानते थे, लेकिन उसे छिपाते थे सिर्फ़ इसलिए कि कहीं मुसलमान उनकी किताबों की बातें पकड़कर उन्हें शर्मिंदा न कर दें।
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