Transliteration: (Wa minhum ummiyyoona laa ya'lamoonal kitaaba illaaa amaaniyya wa in hum illaa yazunnoon)
सिर्फ़ कयास पर नहीं, यक़ीन पर हो ईमान:
यह आयत उन यहूदियों की ओर इशारा करती है जो पढ़े-लिखे नहीं थे और अपनी आसमानी किताब की असल बातें नहीं जानते थे। वे अपनी मनघड़ंत सोच और ख्वाहिशों पर चल रहे थे।
इस्लाम यह सिखाता है कि सच्चा ईमान अंदाज़ों और अंधे अनुसरण पर नहीं, बल्कि हक़ीक़त और प्रमाण पर आधारित होना चाहिए। इसलिए यह आयत बताती है कि अंदाज़ों पर आधारित धर्म की कोई बुनियाद नहीं होती — सच्चाई को समझकर उस पर यक़ीन करना ही असली राह है।
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