कुरान - 2:80 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

80
وَقَالُواْ لَن تَمَسَّنَا ٱلنَّارُ إِلَّآ أَيَّامٗا مَّعۡدُودَةٗۚ قُلۡ أَتَّخَذۡتُمۡ عِندَ ٱللَّهِ عَهۡدٗا فَلَن يُخۡلِفَ ٱللَّهُ عَهۡدَهُۥٓۖ أَمۡ تَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa qaaloo lan tamassanan Naaru illaaa ayyaamam ma'doo dah; qul attakhaztum 'indal laahi 'ahdan falai yukhlifal laahu 'ahdahooo am taqooloona 'alal laahi maa laa ta'lamoon)

[80] और वे कहते हैं: "हमें आग हरगिज़ छू नहीं सकती, सिवाय कुछ [143] दिनों के।" कह दो: "क्या तुमने अल्लाह से कोई वादा लिया है कि अल्लाह अपना वादा कभी नहीं तोड़ेगा [144]? या फिर तुम अल्लाह के बारे में वह बात कहते हो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं [145]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[143]

वंश पर घमंड और नेक अमलों की कमी:
यह आयत बताती है कि सिर्फ अपने पूर्वजों पर घमंड करना, जबकि अच्छे काम न करना, गलत सोच है। बनी इस्राईल समझते थे कि वे नबी की औलाद हैं, इसलिए आग उन्हें छू भी नहीं सकती। लेकिन हर किसी पर अच्छे काम फर्ज़ हैं।

[144]

अल्लाह अपने वादे को नहीं तोड़ता:
अगर उन्होंने वाक़ई अल्लाह से कोई वादा लिया होता, तो अल्लाह उसे ज़रूर निभाता, क्योंकि अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। इसलिए, ऐसा दावा करना बिना आधार के है।

[145]

बिना इल्म के अल्लाह पर बात कहना:
यह बहुत बड़ा गुनाह है कि इंसान अल्लाह के बारे में ऐसी बातें कहे जिनका उसे कोई इल्म नहीं। यह आयत हमें सचेत करती है कि अल्लाह के बारे में हर बात सही ज्ञान और प्रमाण पर आधारित होनी चाहिए।

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