Transliteration: (Fawailul lillazeena yaktuboonal kitaaba bi aidihim summa yaqooloona haazaa min 'indil laahi liyashtaroo bihee samanan qaleelan fawailul lahum mimmaa katabat aydeehim wa wailul lahum mimmaa yaksiboon)
अपने मतलब के लिए अल्लाह की बातों को बदलना:
यह आयत उन यहूदी आलिमों की आलोचना करती है जो किताबे मुक़द्दस (तौरात) में बदलाव करते थे और कहते थे कि यह अल्लाह की बात है, ताकि लोग धोखा खाएं और उन्हें फायदा हो।
दीन को बेचकर दुनियावी फायदा उठाना:
वे लोग अल्लाह की आयतों को बदलकर दुनिया का थोड़ा सा फायदा लेना चाहते थे। यह हराम और निंदनीय काम है।
झूठी कमाई और इल्म का गलत इस्तेमाल:
ऐसे लोगों की कमाई भी हराम होती है और जो कुछ वे लिखते हैं, वह गुमराही फैलाता है। यह आयत चेतावनी देती है कि अल्लाह की किताब में अपनी तरफ़ से बातें जोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat