कुरान - 22:44 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَأَصۡحَٰبُ مَدۡيَنَۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰۖ فَأَمۡلَيۡتُ لِلۡكَٰفِرِينَ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡۖ فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ

Transliteration: (Wa as haabu Madyana wa kuzziba Moosaa fa amlaitu lilkaafireena summa akhaztuhum fakaifa kaana nakeer)

44. और मदयन वालों ने भी [98]; और मूसा को भी झुठलाया गया [99], तो मैंने काफ़िरों को ढील दी, फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया; तो (देखो कि) मेरी सज़ा कैसी थी! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 44 की तफ़सीर

"और मदयन वालों ने भी [98]; और मूसा को भी झुठलाया गया [99], तो मैंने काफ़िरों को ढील दी, फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया; तो (देखो कि) मेरी सज़ा कैसी थी!"

[98] असहाब-ए-मदयन (हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम)

मदयन हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) की बस्ती थी, जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के फ़रज़न्द मदयन के नाम से मशहूर थी। इन लोगों ने नाप-तौल में कमी और शिर्क किया और अपने नबी की तकज़ीब की, तो आग और बादलों के साए के अज़ाब से हलाक कर दिए गए।

[99] हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की तकज़ीब और फ़िरऔन की हलाकत

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को बनी इसराईल ने नहीं बल्कि फ़िरऔन और क़िब्तियों ने झुठलाया था, इसलिए यहाँ 'क़ौमे मूसा' का लफ़्ज़ नहीं फ़रमाया गया बल्कि फ़रमाया गया कि 'मूसा को झुठलाया गया'। अल्लाह ने फ़िरऔन को मुद्दतों ढील दी, मगर जब उसने अपनी हदें पार कर दीं, तो अल्लाह ने उसे दरिया-ए-नील में ग़र्क़ कर दिया। अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त होती है!

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