कुरान - 22:1 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ إِنَّ زَلۡزَلَةَ ٱلسَّاعَةِ شَيۡءٌ عَظِيمٞ

Transliteration: (Yaaa ayyuhan naasuttaqoo Rabbakum; inna zalzalatas Saa'ati shai'un 'azeem)

1. ऐ लोगो! अपने रब से डरो [2]; बेशक क़ियामत का ज़लज़ला (भूकंप) एक बहुत ही भारी (खौफ़नाक) चीज़ है [3]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 1 की तफ़सीर

"ऐ लोगो! अपने रब से डरो [2]; बेशक क़ियामत का ज़लज़ला (भूकंप) एक बहुत ही भारी (खौफ़नाक) चीज़ है [3]!"

[2] तक़्वा और ख़ौफ़े इलाही का आम हुक्म

अल्लाह तआला ने तमाम इंसानों को मुख़ातब फ़रमाकर अपने रब से डरने का हुक्म दिया:

  • काफ़िरों के लिए डरने का मफ़हूम यह है कि वे कुफ़्र छोड़कर ईमान लाएं।

  • गुनाहगारों के लिए यह कि वे गुनाहों से तौबा करके नेककार बनें।

  • और मुत्तक़ीन व सालेहीन के लिए यह कि वे अपने तक़्वे और परहेज़गारी पर साबित-क़दम रहें।

[3] क़ियामत का अज़ीम ज़लज़ला

क़ियामत के वक़्त ऐसा शदीद और आलमगीर ज़लज़ला आएगा जो ज़मीन व आसमान की तारीख़ में कभी न आया होगा। पूरी ज़मीन हिल जाएगी, पहाड़ रेज़ा-रेज़ा होकर उड़ने लगेंगे और हर चीज़ दरहम-बरहम हो जाएगी। यह ज़लज़ला इंसान के होश उड़ा देने के लिए काफ़ी होगा।

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