कुरान - 22:7 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٞ لَّا رَيۡبَ فِيهَا وَأَنَّ ٱللَّهَ يَبۡعَثُ مَن فِي ٱلۡقُبُورِ

Transliteration: (Wa annas Saa'ata aatiya tul laa raiba feeha wa annal laaha yab'asuman fil quboor)

7. और यह कि क़ियामत आने वाली है, इसमें कोई शक नहीं; और यह कि अल्लाह उन सबको दोबारा ज़िन्दा करके उठाएगा जो क़ब्रों में हैं [22] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 7 की तफ़सीर

"और यह कि क़ियामत आने वाली है, इसमें कोई शक नहीं; और यह कि अल्लाह उन सबको दोबारा ज़िन्दा करके उठाएगा जो क़ब्रों में हैं [22] ।"

[22] क़ियामत का यक़ीन और आलम-ए-बर्ज़ख़ से बाअस

क़ियामत का आना एक ऐसी क़तई हक़ीक़त है जिसमें रत्ती बराबर भी शक की गुंजाइश नहीं। यहाँ 'क़ब्रों' से मुराद सिर्फ़ ज़मीनी गढ़ा नहीं बल्कि आलम-ए-बर्ज़ख़ है। इंसान जहां कहीं भी मरा हो — ज़मीन में दफ़्न हो, पानी में बहा हो, या जलकर ख़ाक हो गया हो — अल्लाह उन सबके अज्ज़ा को जमा फ़रमाकर मुकम्मल ज़िन्दा करके हिसाब के लिए हाज़िर फ़रमाएगा।

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