Transliteration: (Wa minan naasi mai yujaadilu fil laahi bighairi 'ilminw wa laa hudanw wa laa Kitaabim Muneer)
"और लोगों में कोई ऐसा भी है जो अल्लाह के बारे में बहस करता है बग़ैर किसी इल्म के और बग़ैर किसी हिदायत के [23] और बग़ैर किसी रौशन किताब के [24];"
यह उन मुतक़ब्बीर काफ़िरों का बयान है जो न तो खुद कोई अक़ली इल्म रखते हैं और न किसी नबी या हिदायत याफ़्ता रहबर की पैरवी करते हैं, बल्कि महज़ अपने तअस्सुब और जहालत की बुनियाद पर तौहीद का इनकार करते हैं।
उनके पास अपने बातिल अक़ीदों के हक़ में कोई आसमानी और रौशन किताब भी नहीं है। जब अक़्ल, नक़्ल और किताब तीनों मौजूद न हों, तो ऐसा झगड़ा सरासर गुमराही और हठधर्मी है।
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