कुरान - 22:8 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَلَا هُدٗى وَلَا كِتَٰبٖ مُّنِيرٖ

Transliteration: (Wa minan naasi mai yujaadilu fil laahi bighairi 'ilminw wa laa hudanw wa laa Kitaabim Muneer)

8. और लोगों में कोई ऐसा भी है जो अल्लाह के बारे में बहस करता है बग़ैर किसी इल्म के और बग़ैर किसी हिदायत के [23] और बग़ैर किसी रौशन किताब के [24]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 8 की तफ़सीर

"और लोगों में कोई ऐसा भी है जो अल्लाह के बारे में बहस करता है बग़ैर किसी इल्म के और बग़ैर किसी हिदायत के [23] और बग़ैर किसी रौशन किताब के [24];"

[23] बग़ैर इल्म और हिदायत के झगड़ा

यह उन मुतक़ब्बीर काफ़िरों का बयान है जो न तो खुद कोई अक़ली इल्म रखते हैं और न किसी नबी या हिदायत याफ़्ता रहबर की पैरवी करते हैं, बल्कि महज़ अपने तअस्सुब और जहालत की बुनियाद पर तौहीद का इनकार करते हैं।

[24] आसमानी किताब से महरूमी

उनके पास अपने बातिल अक़ीदों के हक़ में कोई आसमानी और रौशन किताब भी नहीं है। जब अक़्ल, नक़्ल और किताब तीनों मौजूद न हों, तो ऐसा झगड़ा सरासर गुमराही और हठधर्मी है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now