कुरान - 22:3 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيۡطَٰنٖ مَّرِيدٖ

Transliteration: (Wa minan naasi mai yujaadilu fil laahi bighairi 'ilminw wa yattabi'u kullaa shaitaanim mareed)

3. और लोगों में से कोई ऐसा भी है जो बिना किसी इल्म के अल्लाह के बारे में झगड़ा करता है [6] और हर सरकश शैतान की पैरवी करता है [7]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 3 की तफ़सीर

"और लोगों में से कोई ऐसा भी है जो बिना किसी इल्म के अल्लाह के बारे में झगड़ा करता है [6] और हर सरकश शैतान की पैरवी करता है [7];"

[6] बे-इल्म मुनाज़रे और कुफ़्रिया तक़रार

यह आयत नज़र बिन हारिस जैसे मुनकिरीन के बारे में नाज़िल हुई जो बग़ैर किसी अक़ली या नक़ली दलील के अल्लाह की ज़ात, सिफ़ात और दोबारा ज़िन्दा किए जाने के बारे में झगड़ा करते थे। बे-इल्म होकर दीनी उमूर में बहसो-मुबाहसा करना सख़्त गुनाह है।

[7] सरकश शैतान की पैरवी

जो लोग हक़ की रौशनी छोड़ देते हैं, वे शैतानों के बहकावे में आकर अपनी ख़्वाहिशात के ग़ुलाम बन जाते हैं और हर सरकश शैतान उन्हें अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ गुमराह करता रहता है।

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