कुरान - 15:24 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَقۡدِمِينَ مِنكُمۡ وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَـٔۡخِرِينَ

Transliteration: (Wa la qad 'alimnal mustaqdimeena minkum wa laqad 'alimnal mustaakhireen)

और बेशक हमें मालूम हैं जो तुम में आगे बढ़े [31] और बेशक हमें मालूम हैं जो पीछे रहे [32]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 24 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और बेशक हमें मालूम हैं जो तुम में आगे बढ़े [31] और बेशक हमें मालूम हैं जो पीछे रहे [32]।

[31] पहली सफ़ की फ़ज़ीलत और शाने-नुज़ूल

शाने-नुज़ूल: जब हुज़ूर अकरम ﷺ ने नमाज़ में पहली सफ़ की फ़ज़ीलत बयान फ़रमाई, तो सहाबा-ए-किराम में पहली सफ़ पाने का बड़ा शौक़ पैदा हुआ। कुछ सहाबा ने मस्जिद के क़रीब घर ख़रीदने का इरादा किया ताकि वे पहले पहुँचकर पहली सफ़ हासिल कर सकें। इस जज़्बे को देखकर हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि अपनी जगहों पर रहो, अल्लाह तुम्हारी नियतों से बाख़बर है और तुम्हें इसका सवाब देगा; इस पर यह आयत उतरी (तफ़सीरे रूहुल बयान)। इसके अलावा कुछ मुनाफ़िक़ आख़िरी सफ़ में रहते थे, उनके मुताल्लिक़ भी यह आयत नाज़िल हुई।

[32] नमाज़ में सबक़त का सवाब

इससे मालूम हुआ कि पंजवक्ता नमाज़ों के लिए मस्जिद में जल्दी आना और पहली सफ़ में खड़े होने की कोशिश करना अफ़ज़ल अमल है। अलबत्ता नमाज़-ए-जनाज़ा में आख़िरी सफ़ बेहतर होती है, जबकि आम नमाज़ों में पहली सफ़ की बड़ी फ़ज़ीलत हदीस शरीफ़ में आई है।

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