Transliteration: (Wa arsalnar riyaaha la waaqiha fa anzalnaa minas samaaa'i maaa'an fa asqai naakumoohu wa maaa antum lahoo bikhaazineen)
और हमने बादलों को बोझल करने वाली (गाभिन) हवाएँ भेजीं [28], फिर हमने आसमान से पानी उतारा [29], तो वह तुम्हें पिलाया, और तुम उसका ख़ज़ाना रखने वाले न थे।
क़ुरआन-ए-पाक में रहमत की हवा को 'रियाह' और अज़ाब की तेज़ हवा को 'रीह' कहा गया है। बारिश लाने वाली हवा रहमत की अलामत है। इसलिए हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ ऐसी रहमत की हवा के वक़्त अल्लाह से दुआ करना और तबाही मचाने वाली तेज़ आँधी के वक़्त अल्लाह की पनाह माँगना सुन्नत है।
आसमान से बारिश का पानी बख़ारात और बादलों के निज़ाम के तहत बरसता है। इस पानी की बरकत से कुओं और चश्मों में पानी बढ़ता है, और इंसानों व जानवरों के पीने के काम आता है।
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