कुरान - 15:22 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَأَرۡسَلۡنَا ٱلرِّيَٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَسۡقَيۡنَٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمۡ لَهُۥ بِخَٰزِنِينَ

Transliteration: (Wa arsalnar riyaaha la waaqiha fa anzalnaa minas samaaa'i maaa'an fa asqai naakumoohu wa maaa antum lahoo bikhaazineen)

और हमने बादलों को बोझल करने वाली (गाभिन) हवाएँ भेजीं [28], फिर हमने आसमान से पानी उतारा [29], तो वह तुम्हें पिलाया, और तुम उसका ख़ज़ाना रखने वाले न थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 22 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और हमने बादलों को बोझल करने वाली (गाभिन) हवाएँ भेजीं [28], फिर हमने आसमान से पानी उतारा [29], तो वह तुम्हें पिलाया, और तुम उसका ख़ज़ाना रखने वाले न थे।

[28] हवाएँ बतौर लवाक़िह़ (गाभिन करने वाली)

क़ुरआन-ए-पाक में रहमत की हवा को 'रियाह' और अज़ाब की तेज़ हवा को 'रीह' कहा गया है। बारिश लाने वाली हवा रहमत की अलामत है। इसलिए हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ ऐसी रहमत की हवा के वक़्त अल्लाह से दुआ करना और तबाही मचाने वाली तेज़ आँधी के वक़्त अल्लाह की पनाह माँगना सुन्नत है।

[29] बारिश का पानी और उसकी बरकतें

आसमान से बारिश का पानी बख़ारात और बादलों के निज़ाम के तहत बरसता है। इस पानी की बरकत से कुओं और चश्मों में पानी बढ़ता है, और इंसानों व जानवरों के पीने के काम आता है।

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