कुरान - 15:21 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَإِن مِّن شَيۡءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٖ مَّعۡلُومٖ

Transliteration: (Wa im min shai'in illaa 'indanaa khazaaa 'inuhoo wa maa nunazziluhooo illaa biqadarim ma'loom)

और कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसके हमारे पास ख़ज़ाने न हों [27], और हम उसे एक जाने हुए अंदाज़े से ही उतारते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 21 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसके हमारे पास ख़ज़ाने न हों [27], और हम उसे एक जाने हुए अंदाज़े से ही उतारते हैं।

[27] अल्लाह तआला के मख़्लूक़ ख़ज़ाने

ख़ज़ानों से मुराद मख़्लूक़ ख़ज़ाने हैं, यानी अल्लाह तआला हर चीज़ को पैदा फ़रमाने पर क़ुदरत-ए-ताम्मा रखता है। इसका यह मतलब नहीं कि उसने किसी ख़ास जगह चीज़ें जमा कर रखी हैं। इसी मफ़हूम के तहत अल्लाह तआला फ़रमाता है: "फ़रमा दीजिए (ऐ महबूब), मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने नहीं हैं।" चुनाँचे अल्लाह तआला ख़ालिक़ है, और हुज़ूर अकरम ﷺ को ज़मीन के तमाम ख़ज़ानों की कुंजियाँ (चाबियाँ) अता फ़रमाई गई हैं।

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