Transliteration: (Wal arda madadnaahaa wa alqainaa feehaa rawaasiya wa ambatnaa feehaa min kulli shai'im mawzoon)
और हमने ज़मीन को फैलाया [23] और उसमें लंगर (भारी पहाड़) रख दिए [24] और उसमें हर चीज़ अंदाज़े से उगाई [25]।
ज़मीन को फैलाने से मुराद इसे मख़लूक़ात के रहने के लिए कुशादा और वसीअ बनाना है ताकि तमाम मख़लूक़ इस पर आसानी से ज़िंदगी गुज़ार सके।
इससे मालूम हुआ कि पहाड़ ज़मीन के लिए लंगर का काम करते हैं, जैसे कश्ती को लंगर डालकर थाम दिया जाता है ताकि वह हिचकोले न खाए। इसी तरह पहाड़ों के ज़रिए ज़मीन को ठहराव और सुकून बख़्शा गया है।
अल्लाह तआला ने हर मक़ाम और मौसम की ज़रूरत के मुताबिक़ चीज़ें उगाई हैं। मिसाल के तौर पर बंगाल में चाय की पैदावार ज़्यादा है, जबकि पंजाब में गेहूँ की। कहीं ज़रूरत के मुताबिक़ पैदावार होती है, और इस तक्सीम में अल्लाह तआला की बेपनाह हिकमतें पोशीदा हैं।
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