कुरान - 15:18 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
إِلَّا مَنِ ٱسۡتَرَقَ ٱلسَّمۡعَ فَأَتۡبَعَهُۥ شِهَابٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Illaa manis taraqas sam'a fa atba'ahoo shihaabum mubeen)

मगर जो चोरी-छिपे सुनने की कोशिश करे [21], तो एक रौशन शोला (शिहाब) उसका पीछा करता है [22]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 18 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

मगर जो चोरी-छिपे सुनने की कोशिश करे [21], तो एक रौशन शोला (शिहाब) उसका पीछा करता है [22]।

[21] शैतानों की चोरी-छिपे सुनने की कोशिश

कभी शैतान छिपकर आसमान की पहरेदारी करने वाले फ़रिश्तों की कोई बात सुनने की कोशिश करते हैं। चूँकि अल्लाह तआला से कुछ भी छिपना नामुमकिन है, इसलिए शैतान का पीछा करके उसे दहकते अंगारे से मारा जाता है।

[22] आग के शोले (शिहाब-ए-साक़िब) का वार

इससे मालूम हुआ कि अस्ल सितारा अपनी जगह से नहीं गिरता, बल्कि सितारे से आग का एक तेज़ शोला (अंगारा) निकलता है, जो शैतान को गोली की तरह आ लगता है और उसे जला देता है।

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