Transliteration: (Lahaa sab'atu abwaab; likulli baabim minhum juz'um maqsoom)
उसके सात दरवाज़े हैं [51]; हर दरवाज़े के लिए उन में से एक हिस्सा बँटा हुआ है [52]।
दोज़ख़ के सात दर्जे हैं और हर तबक़े का अलग दरवाज़ा है। हर मुजरिम अपने गुनाह और कुफ़्र के मुताबिक़ अलग तबक़े में होगा। इन सात दर्जों के नाम हैं: जहन्नम, लज़ा, हुत़मा, सईर, सक़र, जहीम, और हाविया।
इसी तरह शैतान के पैरोकार भी सात क़िस्म के हैं। कुफ़्र और सरकशी के दर्जात के मुताबिक़ हर गिरोह का मुक़र्रर दर्जा और दरवाज़ा तय है।
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