कुरान - 15:44 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
لَهَا سَبۡعَةُ أَبۡوَٰبٖ لِّكُلِّ بَابٖ مِّنۡهُمۡ جُزۡءٞ مَّقۡسُومٌ

Transliteration: (Lahaa sab'atu abwaab; likulli baabim minhum juz'um maqsoom)

उसके सात दरवाज़े हैं [51]; हर दरवाज़े के लिए उन में से एक हिस्सा बँटा हुआ है [52]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 44 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

उसके सात दरवाज़े हैं [51]; हर दरवाज़े के लिए उन में से एक हिस्सा बँटा हुआ है [52]।

[51] जहन्नम के सात तबक़ात और दरवाज़े

दोज़ख़ के सात दर्जे हैं और हर तबक़े का अलग दरवाज़ा है। हर मुजरिम अपने गुनाह और कुफ़्र के मुताबिक़ अलग तबक़े में होगा। इन सात दर्जों के नाम हैं: जहन्नम, लज़ा, हुत़मा, सईर, सक़र, जहीम, और हाविया।

[52] शैतान के पैरोकारों की सात क़िस्में

इसी तरह शैतान के पैरोकार भी सात क़िस्म के हैं। कुफ़्र और सरकशी के दर्जात के मुताबिक़ हर गिरोह का मुक़र्रर दर्जा और दरवाज़ा तय है।

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