Transliteration: (Inna 'ibaadee laisa laka 'alaihim sultaanun illaa manittaba'aka minal ghaaween)
बेशक जो मेरे बन्दे हैं उन पर तेरा कोई क़ाबू (ज़ोर) नहीं [48], सिवाय उन गुमराहों के जो तेरी पैरवी करें [49]।
इससे मालूम हुआ कि तमाम अम्बिया मासूम हैं, और बाज़ कामिल औलिया-ए-किराम महफ़ूज़ हैं। यानी नबी से कभी गुनाह नहीं हो सकता, और कामिल औलिया (जैसे खुलफ़ा-ए-राशेदीन) से गुनाह सरज़द नहीं होता।
शैतान किसी को ज़बरदस्ती गुमराह नहीं करता बल्कि इन्सान अपनी मर्ज़ी से उसके पीछे चलता है। तमाम अम्बिया और औलिया शैतान से पनाह माँगते रहे, क्योंकि अगरचे वे उसके तसल्लुत से महफ़ूज़ हैं, मगर वसवसों से कोई बेख़ौफ़ नहीं। हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि नमाज़ में वसवसों का आना मोमिन होने की पहचान है, क्योंकि शैतान काफ़िरों से तो बेफ़िक्र रहता है और मोमिनों के ईमान पर डाका डालने आता है।
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