Transliteration: (Illaa 'ibaadaka minhumul mukhlaseen)
"सिवाय तेरे उन बन्दों के जो उन में से चुने हुए (ख़ालिस) हैं [46]।"
इससे साबित हुआ कि तमाम अम्बिया किराम मासूम होते हैं। गुनाह शैतान या नफ़्स-ए-अम्मारा की तरफ़ से होता है, और अम्बिया के नफ़ूस इन तमाम बुराइयों से पाक होते हैं। हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: "मगर जिस पर मेरा रब रहम फ़रमाए" (सूरह यूसुफ़, आयत 53)। शैतान उनको कभी नहीं बहका सकता था। जो लोग अम्बिया की इस्मत (मासूमियत) का इनकार करते हैं, वे शैतान से भी बदतर हैं।
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