कुरान - 3:120 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

120
إِن تَمۡسَسۡكُمۡ حَسَنَةٞ تَسُؤۡهُمۡ وَإِن تُصِبۡكُمۡ سَيِّئَةٞ يَفۡرَحُواْ بِهَاۖ وَإِن تَصۡبِرُواْ وَتَتَّقُواْ لَا يَضُرُّكُمۡ كَيۡدُهُمۡ شَيۡـًٔاۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا يَعۡمَلُونَ مُحِيطٞ

Transliteration: (In tamsaskum hasanatun tasu'hum wa in tusibkum saiyi'atuny yafrahoo bihaa wa in tasbiroo wa tattaqoo laa yad urrukum kaiduhum shai'aa; innal laaha bimaa ya'maloona muheet)

अगर तुम्हें कोई भलाई पहुंचे तो उन्हें बुरा लगता है, और अगर तुम पर कोई मुसीबत आ पड़े तो वे उससे ख़ुश होते हैं; और अगर तुम सब्र करो और तक़्वा इख़्तियार करो तो उनका मक्र व फ़रेब तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकता; बेशक जो कुछ वे करते हैं अल्लाह ने उसका अहाता कर रखा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 120 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 120

✅ सब्र और तक़्वा दुश्मनों की साज़िशों का तोड़

अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि मोमिनों का सब्र और परहेज़गारी दुश्मनों के हर मक्र, साज़िश और हसद को बे-असर बना देती है।

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