कुरान - 3:121 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

121
وَإِذۡ غَدَوۡتَ مِنۡ أَهۡلِكَ تُبَوِّئُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ مَقَٰعِدَ لِلۡقِتَالِۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

Transliteration: (Wa iz ghadawta min ahlika tubawwi'ul mu'mineena maqaa'ida lilqitaal; wallaahu samee'un 'aleem)

और (याद कीजिए ऐ नबी!) जब आप सुबह सवेरे अपने काशाने से निकलकर मोमिनों को जंग (ओहद) के मोर्चों पर तैयनात फ़रमा रहे थे; और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 121 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 121

✅ ग़ज़वा-ए-ओहद की इब्तिदा

नबी-ए-अकरम (सल्ल.) ने ओहद के मैदान में सहाबा के मोर्चे मुक़र्रर फ़रमाए और तीरंदाज़ों को जबले रुमात पर पाबंदी का हुक्म दिया।

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