Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanus biroo wa saabiroo wa raabitoo wattaqul laaha la'allakum tuflihoon)
इस आयत में, जो सूरा आले-इमरान की आख़िरी आयत है, अल्लाह तआला ईमान वालों को मुश्किल हालात, जंग और ईमानी इम्तिहानों के वक़्त चार अहम बातों की ताकीद फ़रमा रहे हैं:
इससे हमें ये हिकमत मिलती है कि इस्लामी सरहदों की हिफ़ाज़त करना भी इबादत है। मोर्चे पर तैनात रहने वाले मुसलमान हर वक़्त अलर्ट रहते हैं, जो कि अल्लाह के नज़दीक जिहाद की तरह सवाब वाला अमल है। यहां तक कि जिहाद की तैयारी करना — यानी खतरे वाले इलाक़ों में मुस्तैद रहना भी एक इबादत है।
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