कुरान - 3:198 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

198
لَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ لَهُمۡ جَنَّـٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا نُزُلٗا مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِۗ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيۡرٞ لِّلۡأَبۡرَارِ

Transliteration: (Laakinil lazeenat taqaw Rabbahum lahum Jannnaatun tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa nuzulammin 'indil laah; wa maa 'indal laahi khairul lil abraar)

लेकिन जो लोग अपने रब से डरते हैं, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जिसमें वे हमेशा रहेंगे — यह अल्लाह की तरफ़ से मेहमाननवाज़ी है [451], और अल्लाह के पास जो है वह परहेज़गारों के लिए और बेहतर है [452]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 198 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आल-इमरान – आयत 198 की तफ़्सीर

 

✅ [451] जन्नतियों की इज़्ज़त और मालिकाना हक़

यह आयत परहेज़गारों को मिलने वाली जन्नत की नेमतों को बयान करती है। यहाँ जन्नत को अल्लाह की मेहमाननवाज़ी कहा गया है, जिससे मालूम होता है कि जैसे कोई मेज़बान अपने मेहमान की हर तरह से ख़ातिर करता है, वैसे ही अल्लाह भी जन्नतियों को इज़्ज़त और प्यार से नवाज़ेगा।

मगर यह भी साफ़ किया गया है कि वे सिर्फ मेहमान नहीं होंगे — "उनके लिए बाग़ हैं" — यह अल्फ़ाज़ इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि वो इन बाग़ों के मालिक भी होंगे, और ये जन्नत हमेशा के लिए उनकी मिल्कियत होगी।

✅ [452] आख़िरत की नेमतें दुनिया से बेहतर

आयत का यह हिस्सा यह बताता है कि अल्लाह के पास जो नेमतें हैं — यानी आख़िरत के इनाम — दुनिया की हर नेमत से बेहतर हैं।

दुनिया की लज़्ज़तें चंद रोज़ की हैं, मगर आख़िरत की नेमतें हमेशा की हैं। यहां तक कि क़बूल अमल, जो अल्लाह के यहां पसंद आ जाए, वो भी दुनिया की तमाम दौलत और कामयाबी से हज़ार गुना बेहतर है।

यह आयत हमें समझाती है कि असली मक़सद यही होना चाहिए — फानी दुनिया नहीं, बल्कि हमेशा रहने वाली आख़िरत की कामयाबी।

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