Transliteration: (Laakinil lazeenat taqaw Rabbahum lahum Jannnaatun tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa nuzulammin 'indil laah; wa maa 'indal laahi khairul lil abraar)
यह आयत परहेज़गारों को मिलने वाली जन्नत की नेमतों को बयान करती है। यहाँ जन्नत को अल्लाह की मेहमाननवाज़ी कहा गया है, जिससे मालूम होता है कि जैसे कोई मेज़बान अपने मेहमान की हर तरह से ख़ातिर करता है, वैसे ही अल्लाह भी जन्नतियों को इज़्ज़त और प्यार से नवाज़ेगा।
मगर यह भी साफ़ किया गया है कि वे सिर्फ मेहमान नहीं होंगे — "उनके लिए बाग़ हैं" — यह अल्फ़ाज़ इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि वो इन बाग़ों के मालिक भी होंगे, और ये जन्नत हमेशा के लिए उनकी मिल्कियत होगी।
आयत का यह हिस्सा यह बताता है कि अल्लाह के पास जो नेमतें हैं — यानी आख़िरत के इनाम — दुनिया की हर नेमत से बेहतर हैं।
दुनिया की लज़्ज़तें चंद रोज़ की हैं, मगर आख़िरत की नेमतें हमेशा की हैं। यहां तक कि क़बूल अमल, जो अल्लाह के यहां पसंद आ जाए, वो भी दुनिया की तमाम दौलत और कामयाबी से हज़ार गुना बेहतर है।
यह आयत हमें समझाती है कि असली मक़सद यही होना चाहिए — फानी दुनिया नहीं, बल्कि हमेशा रहने वाली आख़िरत की कामयाबी।
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