कुरान - 3:195 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

195
فَٱسۡتَجَابَ لَهُمۡ رَبُّهُمۡ أَنِّي لَآ أُضِيعُ عَمَلَ عَٰمِلٖ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰۖ بَعۡضُكُم مِّنۢ بَعۡضٖۖ فَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ وَأُخۡرِجُواْ مِن دِيَٰرِهِمۡ وَأُوذُواْ فِي سَبِيلِي وَقَٰتَلُواْ وَقُتِلُواْ لَأُكَفِّرَنَّ عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَأُدۡخِلَنَّهُمۡ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ ثَوَابٗا مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسۡنُ ٱلثَّوَابِ

अनुवाद -

फिर उनके रब ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई [444]: “मैं तुम में से किसी अमल करने वाले का अमल ज़ाया नहीं करता, चाहे वह मर्द हो या औरत [445]; तुम सब एक-दूसरे से हो। जो लोग हिजरत कर गए, और अपने घरों से निकाले गए, और मेरे रास्ते में सताए गए, और जिन्होंने लड़ाई की और शहीद हो गए — मैं यक़ीनन उनकी बुराइयों को दूर कर दूँगा [446] और उन्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करूँगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये अल्लाह की तरफ़ से इनाम है, और सबसे बेहतरीन इनाम तो अल्लाह ही के पास है [448]।

सूरह आल-इमरान आयत 195 तफ़सीर


📖 सूरा आल-इमरान - आयत 195 की तफ़्सीर

 

✅ [444] अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल कर ली

इस आयत में बताया गया कि अल्लाह ने सच्चे ईमान वालों की दिल से की गई दुआ सुन ली और उसे कबूल भी किया। अल्लाह अपने बंदों की दुआ को सुनता है और इंसाफ़ और रहमत के साथ उसका जवाब देता है। यह इशारा है कि अल्लाह की तरफ़ से कोई जवाब ना आने का मतलब यह नहीं कि दुआ कुबूल नहीं हुई — वह अपने वक़्त और हिकमत से पूरी होती है।

✅ [445] मर्द और औरत दोनों के लिए बराबर इनाम

अल्लाह ने साफ़ कह दिया: “मैं तुम में से किसी अमल करने वाले का अमल ज़ाया नहीं करता, चाहे वह मर्द हो या औरत।” इस से ये बातें साबित होती हैं:

  • इनाम के लिहाज़ से मर्द और औरत दोनों बराबर हैं।
  • सब इंसान एक-दूसरे से हैं, यानी बराबरी के दर्जे में हैं।
  • कोई भी नेक अमल बेकार नहीं जाता, चाहे वो किसी भी शख्स ने किया हो।

✅ [446] अल्लाह के रास्ते में कुर्बानी देने वालों का इनाम

इस हिस्से में उन लोगों का ज़िक्र है जिनके लिए अल्लाह ने ख़ास इनाम तय किया:

  • जिन्होंने हिजरत की
  • जिन्हें अपने घरों से निकाला गया
  • जिन्हें सताया गया
  • जिन्होंने अल्लाह की राह में लड़ाई की और शहीद हुए

ऐसे लोगों को अल्लाह दो बड़ी नेमतें देगा:

  • उनके गुनाह माफ़ कर देगा, और
  • जन्नत में दाख़िल करेगा, जहां हमेशा की नेमतें और सुकून होगा।

✅ [448] सबसे बेहतरीन इनाम अल्लाह के पास है

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: “…और सबसे बेहतरीन इनाम तो अल्लाह ही के पास है।” इस से हमें ये सीख मिलती है:

  • जो इनाम अल्लाह देता है, वह इंसानी सोच से कहीं ज़्यादा बड़ा और क़ीमती होता है।
  • ये सिर्फ़ बदला नहीं होता, बल्कि अल्लाह की रहमत और फ़ज़ल होता है।

ये आयत तस्ली और तश्फ़ीक़ (सांत्वना और हौसला) देती है उन सभी लोगों को जो ईमान की राह में कुर्बानी देते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now