कुरान - 3:196 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

196
لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِي ٱلۡبِلَٰدِ

Transliteration: (Laa yaghurrannaka taqal lubul lazeena kafaroo fil bilaad)

(ऐ मुहम्मद ﷺ!) इनकार करने वालों का शहरों में चलना-फिरना तुम्हें धोखे में न डाले [449] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 196 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आल-इमरान – आयत 196 की तफ़्सीर

 

✅ [449] धन और अल्लाह की मेहरबानी को समझना

इस आयत में रसूल ﷺ और उनके ज़रिए सभी मोमिनों को सावधान किया गया है कि वे काफ़िरों की बाहरी कामयाबी, दौलत और आज़ादी को देखकर धोखा न खाएं। इससे यह शिक्षा मिलती है कि दुनियावी माल और आराम अल्लाह की मेहरबानी का पैमाना नहीं हैं। ग़ैर-ईमान वालों के पास जो कुछ है, वह यह नहीं दिखाता कि वे अल्लाह के क़रीब हैं या आख़िरत में कामयाब होंगे। एक गहरे उदाहरण के ज़रिए समझाया गया है: मोमिन एक दूल्हे की तरह होता है, और यह दुनिया उस पर उड़ाए गए चीज़ों की तरह है। दूसरे लोग उन्हें उठाकर इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन असल इनाम मोमिन के लिए है — इस दुनिया में नहीं, बल्कि आख़िरत में।

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