कुरान - 3:118 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ بِطَانَةٗ مِّن دُونِكُمۡ لَا يَأۡلُونَكُمۡ خَبَالٗا وَدُّواْ مَا عَنِتُّمۡ قَدۡ بَدَتِ ٱلۡبَغۡضَآءُ مِنۡ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَمَا تُخۡفِي صُدُورُهُمۡ أَكۡبَرُۚ قَدۡ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِۖ إِن كُنتُمۡ تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo laa tattakhizoo bitaanatam min doonikum laa ya'loonakum khabaalanw waddoo maa 'anittum qad badatil baghdaaa'u min afwaahihim; wa maa tukhfee sudooruhum akbar; qad baiyannaa lakumul Aayaati in kuntum ta'qiloon)

ऐ ईमान वालो! अपने (दीनी भाइयों) के सिवा ग़ैरों को अपना राज़दार न बनाओ; वे तुम्हारी तबाही में कोई कसर नहीं छोड़ते, वे तो उस चीज़ से ख़ुश होते हैं जिससे तुम्हें तकलीफ़ पहुंचे; बुग़्ज़ व कीना तो उनके मुंह से ज़ाहिर हो चुका है, और जो कुछ उनके सीनों ने छुपा रखा है वह इससे भी कहीं बड़ा है; हमने तुम्हारे लिए निशानियां खोलकर बयान कर दी हैं अगर तुम अक़्ल रखते हो! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 118

✅ ग़ैरों को राज़दार न बनाने की हिदायत

इस्लामी मुआशरे की सलामती के लिए यह बुनियादी हुक्म है कि दुश्मनाने दीन को अपना दिली राज़दार न बनाया जाए जो अंदर ही अंदर मुसलमानों की तबाही की ताक में रहते हैं।

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