कुरान - 3:117 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
مَثَلُ مَا يُنفِقُونَ فِي هَٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا كَمَثَلِ رِيحٖ فِيهَا صِرٌّ أَصَابَتۡ حَرۡثَ قَوۡمٖ ظَلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ فَأَهۡلَكَتۡهُۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ ٱللَّهُ وَلَٰكِنۡ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ

Transliteration: (Masalu maa yunfiqoona fee haazihil hayaatid dunyaa kamasali reehin feehaa sirrun asaabat harsa qawmin zalamooo anfusahum fa ahlakath; wa maa zalamahumul laahu wa laakin anfusahum yazlimoon)

जो कुछ वे इस दुनियावी ज़िंदगी में ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल उस हवा की तरह है जिसमें सख़्त पाला (ठंड) हो, जो उन लोगों की खेती पर आ पड़े जिन्होंने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया था और उसे बर्बाद कर दे; और अल्लाह ने उन पर ज़ुल्म नहीं किया बल्कि वे ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 117

✅ बे-ईमान के आमाल की बर्बादी

काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की ख़ैरात व रियाकारी की मिसाल उस बर्फ़ानी आंधी की तरह है जो लहलहाती खेती को पलक झपकते में तबाह कर देती है; ईमान के बग़ैर कोई अमल क़बूल नहीं।

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