कुरान - 3:115 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
وَمَا يَفۡعَلُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَلَن يُكۡفَرُوهُۗ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Wa maa yaf'aloo min khairin falai yukfarooh; wallaahu 'aleemun bilmuttaqeen)

और जो कुछ भी भलाई वे करें, वह हरगिज़ ज़ाया नहीं की जाएगी [254]। और अल्लाह परहेज़गारों को खूब जानता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 115 की तफ़्सीर

 

✅ [254] नेकियों की क़ुबूलियत के लिए ईमान शर्त है

इस आयत से यह मालूम होता है कि कोई ग़ैर-मुस्लिम दुनिया में जितने भी अच्छे काम कर ले, आख़िरत में वह अल्लाह की मग़फ़िरत या रहमत का हक़दार नहीं हो सकता।

क्योंकि ईमान (ईमान बिल्लाह) अच्छे अमल की बुनियादी शर्त है — जैसे कि नमाज़ के लिए वुज़ू ज़रूरी है। अगर अस्ल (ईमान) ही काट दी जाए, तो फिर शाख़ों (नेक अमाल) को सींचने का कोई फायदा नहीं होता — वे बेकार और बेअसर हो जाते हैं।

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