Transliteration: (Yu'minoona billaahi wal Yawmil Aakhiri wa ya'muroona bilma'roofi wa yanhawna 'anil munkari wa yusaari'oona fil khairaati wa ulaaa'ika minas saaliheen)
"अल्लाह पर ईमान लाना" अपने अंदर यह बात रखता है कि रसूलुल्लाह ﷺ पर भी ईमान लाया जाए। क्योंकि रसूल के बिना अल्लाह पर ईमान मुकम्मल नहीं होता। इसीलिए सही और क़ाबिले-क़ुबूल ईमान वही है, जिसमें अल्लाह के साथ-साथ उसके रसूल पर भी यक़ीन हो।
"जल्दी करते हैं" का मतलब यह है कि या तो वे एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं नेक कामों में, या फिर नेकी का मौका मिलते ही उसमे देर नहीं करते।
ध्यान रहे कि इशा की नमाज़ को उस के मुस्तहब वक़्त तक देर से पढ़ना, इस हुक्म के खिलाफ़ नहीं, बल्कि यह भी फज़ीलत वाला अमल है। इससे यह भी समझा गया कि नेकियों में मुक़द्दस मुकाबला (positive competition) की तरगीब दी गई है, जो कि हसद या लालच से अलग है।
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