कुरान - 3:114 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَيَأۡمُرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَيُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ

Transliteration: (Yu'minoona billaahi wal Yawmil Aakhiri wa ya'muroona bilma'roofi wa yanhawna 'anil munkari wa yusaari'oona fil khairaati wa ulaaa'ika minas saaliheen)

वे अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं [252], भलाई का हुक्म देते हैं, बुराई से रोकते हैं, और नेकी के कामों में जल्दी करते हैं [253]। यही लोग सच्चे नेक हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 114 की तफ़्सीर

 

✅ [252] अल्लाह पर ईमान में रसूल ﷺ पर ईमान शामिल है

"अल्लाह पर ईमान लाना" अपने अंदर यह बात रखता है कि रसूलुल्लाह ﷺ पर भी ईमान लाया जाए। क्योंकि रसूल के बिना अल्लाह पर ईमान मुकम्मल नहीं होता। इसीलिए सही और क़ाबिले-क़ुबूल ईमान वही है, जिसमें अल्लाह के साथ-साथ उसके रसूल पर भी यक़ीन हो।

✅ [253] नेकियों में आगे बढ़ने की तरगीब

"जल्दी करते हैं" का मतलब यह है कि या तो वे एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं नेक कामों में, या फिर नेकी का मौका मिलते ही उसमे देर नहीं करते।

ध्यान रहे कि इशा की नमाज़ को उस के मुस्तहब वक़्त तक देर से पढ़ना, इस हुक्म के खिलाफ़ नहीं, बल्कि यह भी फज़ीलत वाला अमल है। इससे यह भी समझा गया कि नेकियों में मुक़द्दस मुकाबला (positive competition) की तरगीब दी गई है, जो कि हसद या लालच से अलग है।

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