कुरान - 3:136 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

136
أُوْلَـٰٓئِكَ جَزَآؤُهُم مَّغۡفِرَةٞ مِّن رَّبِّهِمۡ وَجَنَّـٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ وَنِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ

Transliteration: (Ulaaa'ika jazaaa'uhum maghfiratum mir Rabbihim wa Jannaatun tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feeha; wa ni'ma ajrul 'aamileen)

ऐसे लोगों को उनके रब की तरफ़ से माफ़ी और वो बाग़ मिलेंगे जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहेंगे। और नेक काम करने वालों का बदला कितना अच्छा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 136 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 136 की तफ़्सीर

 

✅ अल्लाह की माफ़ी और हमेशा की जन्नत

इस आयत में उन लोगों का इनाम बताया गया है जो गुनाहों के बाद सच्ची तौबा करते हैं और नेक अमल अपनाते हैं। अल्लाह उन्हें सबसे पहले अपनी माफ़ी अता करता है, फिर ऐसे बाग़ देता है जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जहाँ वे हमेशा के लिए रहेंगे। यह इनाम सिर्फ़ नेकी करने वालों के लिए है, और अल्लाह का इनाम बेहतरीन है।

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