कुरान - 3:137 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

137
قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِكُمۡ سُنَنٞ فَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُكَذِّبِينَ

अनुवाद -

तुमसे पहले बहुत सी उम्मतें गुज़र चुकी हैं। तो धरती में चलो-फिरो [292] और देखो कि जिन्होंने सच्चाई को झुटलाया उनका क्या अंजाम हुआ [293]।

सूरह आल-इमरान आयत 137 तफ़सीर


📖 सूरा आले-इमरान – आयत 137 की तफ़्सीर

 

✅ [292] इनकार करने वालों के खंडहरों से सबक़

"फिर देखो" — इस शब्द के ज़रिये अरब के इनकार करने वालों से कहा गया है कि उन बस्तियों की सैर करो जो कभी उन कौमों की थी जिन्होंने अल्लाह के रसूलों का विरोध किया। उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे तबाह कर दी गईं। उनके खंडहर आज भी इस बात की गवाही देते हैं कि हक़ को झुटलाने वालों का अंजाम कितना भयानक होता है। इससे सबक़ लेकर हज़रत मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाना चाहिए ताकि वैसा अज़ाब उन पर न आए।

✅ [293] तबाही और रहमत से सीख लेना

इस आयत से ये भी पता चलता है कि अगर किसी ने अल्लाह के अज़ाब को अपनी आंखों से नहीं देखा, तो वो उन जगहों की ज़ियारत करे जहां अज़ाब आया था, और उससे सबक़ ले। इसी तरह, अल्लाह की रहमत को देखना हो तो उन जगहों पर जाएं जहां अल्लाह के दोस्त (औलिया) दफन हैं, क्योंकि उनकी मौजूदगी से वो ज़मीन बरकत और ताज़गी से भर जाती है। इस आयत से यह भी साबित होता है कि इस तरह के सफ़र करना न सिर्फ़ जायज़ है बल्कि रूहानी फ़ायदे का ज़रिया भी है

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now