Transliteration: (Qad khalat min qablikum sunanum faseeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana 'aaqiba tul mukazzibeen)
"फिर देखो" — इस शब्द के ज़रिये अरब के इनकार करने वालों से कहा गया है कि उन बस्तियों की सैर करो जो कभी उन कौमों की थी जिन्होंने अल्लाह के रसूलों का विरोध किया। उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे तबाह कर दी गईं। उनके खंडहर आज भी इस बात की गवाही देते हैं कि हक़ को झुटलाने वालों का अंजाम कितना भयानक होता है। इससे सबक़ लेकर हज़रत मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाना चाहिए ताकि वैसा अज़ाब उन पर न आए।
इस आयत से ये भी पता चलता है कि अगर किसी ने अल्लाह के अज़ाब को अपनी आंखों से नहीं देखा, तो वो उन जगहों की ज़ियारत करे जहां अज़ाब आया था, और उससे सबक़ ले। इसी तरह, अल्लाह की रहमत को देखना हो तो उन जगहों पर जाएं जहां अल्लाह के दोस्त (औलिया) दफन हैं, क्योंकि उनकी मौजूदगी से वो ज़मीन बरकत और ताज़गी से भर जाती है। इस आयत से यह भी साबित होता है कि इस तरह के सफ़र करना न सिर्फ़ जायज़ है बल्कि रूहानी फ़ायदे का ज़रिया भी है।
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