कुरान - 3:139 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

139
وَلَا تَهِنُواْ وَلَا تَحۡزَنُواْ وَأَنتُمُ ٱلۡأَعۡلَوۡنَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa laa tahinoo wa laa tahzanoo wa antumul a'lawna in kuntum mu'mineen)

कमज़ोर न पड़ो और न ही ग़म खाओ, और तुम ही सर्वोच्च रहोगे अगर तुम ईमान रखते हो [294]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 139 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 139 की तफ़्सीर

 

✅ [294] सच्चे ईमान पर इज़्ज़त का वादा

यह अल्लाह का सच्चा और पुख़्ता वादा है कि ईमानदार लोग कभी ज़लील नहीं होंगे। हम ही हैं जिन्होंने सच्चे ईमान और शर्तों को पूरा नहीं किया, और नतीजतन हमारी जिल्लत हुई। इस आयत से पता चलता है कि हज़रत मुहम्मद ﷺ के सभी सहाबा, खासकर चार खलीफ़ा-ए-राशिदीन, सच्चे मोमिन थे। उन्होंने अपने ईमान को साबित किया, इसलिए अल्लाह ने उन्हें ख़िलाफ़त, हुकूमत और रहनुमाई अता की। उनका ऊँचा मुक़ाम और इज़्ज़त सच्चे ईमान और सब्र का नतीजा थी।

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