Transliteration: (Wa liyumahhisal laahul lazeena aamanoo wa yamhaqal kaafireen)
इस आयत से यह ज्ञात होता है कि मोमिन की मौत उसके गुनाहों की पाकी का ज़रिया बनती है, जबकि ग़ैर-ईमान वाले की मौत उसका सम्पूर्ण मिटाया जाना है।
हालाँकि दोनों ही युद्ध या समान हालात में मारे जा सकते हैं, लेकिन उनके अंजाम बिल्कुल भिन्न होते हैं।
मोमिन का दर्जा ऊँचा किया जाता है और वह पाक होता है, जबकि काफ़िर ज़िल्लत के साथ मिटा दिया जाता है।
यह अल्लाह की इंसाफ़ और हिकमत को दर्शाता है कि बाहरी घटनाएँ एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन उनका रूहानी अंजाम पूरी तरह अलग होता है।
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