कुरान - 3:141 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

141
وَلِيُمَحِّصَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَيَمۡحَقَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa liyumahhisal laahul lazeena aamanoo wa yamhaqal kaafireen)

और ताकि अल्लाह मोमिनों को आज़माइशों के ज़रिए पाक कर दे, और काफ़िरों को मिटा दे [299] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 141 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 141 की तफ़्सीर

 

✅ [299] मोमिनों और काफ़िरों का अलग-अलग अंजाम

इस आयत से यह ज्ञात होता है कि मोमिन की मौत उसके गुनाहों की पाकी का ज़रिया बनती है, जबकि ग़ैर-ईमान वाले की मौत उसका सम्पूर्ण मिटाया जाना है।
हालाँकि दोनों ही युद्ध या समान हालात में मारे जा सकते हैं, लेकिन उनके अंजाम बिल्कुल भिन्न होते हैं।
मोमिन का दर्जा ऊँचा किया जाता है और वह पाक होता है, जबकि काफ़िर ज़िल्लत के साथ मिटा दिया जाता है।
यह अल्लाह की इंसाफ़ और हिकमत को दर्शाता है कि बाहरी घटनाएँ एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन उनका रूहानी अंजाम पूरी तरह अलग होता है।

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