कुरान - 3:142 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

142
أَمۡ حَسِبۡتُمۡ أَن تَدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ وَلَمَّا يَعۡلَمِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ جَٰهَدُواْ مِنكُمۡ وَيَعۡلَمَ ٱلصَّـٰبِرِينَ

Transliteration: (Am hasibtum an tadkhulul Jannnata wa lammaa ya'lamil laahul lazeena jaahadoo minkum wa ya'lamas saabireen)

क्या तुमने यह समझ रखा है कि तुम जन्नत में यूं ही दाख़िल हो जाओगे हालांकि अभी अल्लाह ने तुम में से जिहाद करने वालों को परखा ही नहीं और न सब्र करने वालों को आज़माया है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 142 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 142

✅ आज़माइश और सब्र जन्नत की शर्त

जन्नत महज़ दावों से नहीं मिलती बल्कि राह-ए-हक़ में कुर्बानियां देने और मुश्किलात पर सब्र करने से हासिल होती है।

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