कुरान - 3:148 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

148
فَـَٔاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ ثَوَابَ ٱلدُّنۡيَا وَحُسۡنَ ثَوَابِ ٱلۡأٓخِرَةِۗ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Fa aataahumul laahu sawaabad dunyaa wa husna sawaabil Aakhirah; wallaahu yuhibbul muhsineen)

तो अल्लाह ने उन्हें इस दुनिया का इनाम दिया [319], और आख़िरत का बेहतरीन इनाम दिया। और अल्लाह नेहसान करने वालों से मुहब्बत करता है [320]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 148 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आल-इमरान – आयत 148 की तफ़्सीर

 

✅ [319] दोनों जहानों का इनाम

दुनिया का इनाम मक्की फ़तह, कामयाबी और इज़्ज़त से है, जबकि आख़िरत का इनाम जन्नत और गुनाहों की माफ़ी है। इससे मालूम होता है कि दीन की ख़िदमत करने वालों को दुनिया में भी नेमतें मिलती हैं, मगर आख़िरत का इनाम ज़्यादा अफ़ज़ल और हमेशा रहने वाला है। इसलिए यहां "भलाई" को अहमियत देकर ज़िक्र किया गया, ताकि रूहानी कामयाबी की क़ीमत को मालूम किया जा सके।

✅ [320] सच्ची परहेज़गारी इन्किसारी में है

यह कितनी हुस्न की बात है कि ये परहेज़गार लोग खुद को गुनहगार समझते हैं, मगर उनका परवरदिगार उन्हें नेकी करने वाला और नेक बंदा कहता है! इससे मालूम होता है कि इन्किसारी और फ़रमाबरदारी इबादत की बुलंदी है। ऐसे लोग अल्लाह के महबूब होते हैं, जैसा कि ख़ुद अल्लाह फरमाता है: "अल्लाह नेहसान करने वालों से मुहब्बत करता है।"

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now