कुरान - 3:149 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

149
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِن تُطِيعُواْ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَرُدُّوكُمۡ عَلَىٰٓ أَعۡقَٰبِكُمۡ فَتَنقَلِبُواْ خَٰسِرِينَ

अनुवाद -

ऐ ईमान वालों! यदि तुम इनकार करने वालों की राह पर चले [321], तो वे तुम्हें तुम्हारी ऐड़ियों के बल फिरा देंगे, और तब तुम घाटे में पड़ जाओगे [322]।

सूरह आल-इमरान आयत 149 तफ़सीर


📖 सूरा आले-इमरान – आयत 149 की तफ़्सीर

 

✅ [321] कुफ़्फ़ार की दीन के मामले में पैरवी से चेतावनी

इस आयत में चेतावनी दी गई है उन मुसलमानों को जो कुफ़्फ़ार के तौर-तरीक़ों, रस्मों या अकीदों की पैरवी करते हैं। यह ममनूअत मजबूरी में दुनिया के मामलों में की गई इताअत पर लागू नहीं होती, बल्कि मुराद है जानबूझकर उनके नक़्श-ए-क़दम पर चलना। यहाँ "इनकार करने वाले" से मुराद है तमाम गैर-मुस्लिम — चाहे मशरिक़ हों, यहूदी हों, नसारा हों या मुनाफ़िक़ जो उनके मददगार हों

✅ [322] तमाम मुसलमानों के लिए सख़्त चेतावनी

यह आयत एक सख़्त चेतावनी है। अगर यह सहाबा-ए-किराम, जो उम्मत के सबसे अज़ीम लोग हैं, उनके लिए है — तो हमारा क्या हाल होना चाहिए? किसी को भी अपने ईमान पर इतना भरोसा नहीं करना चाहिए कि वह कुफ़्फ़ार की सोहबत या तरीक़ों से बेअसर रहेगा। अगर हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी को जन्नत के महफ़ूज़ माहौल में शैतान धोखा दे सकता है, तो हम जो गुनाहगार और फ़ितनों से घिरे हुए हैं, कैसे महफ़ूज़ रह सकते हैं? यह आयत सिखाती है कि कुफ़्फ़ार के तरीक़ों की अंधी पैरवी करना आख़िरकार धोखे, नुक़सान और रूहानी तबाही का सबब बनता है।

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