कुरान - 3:160 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

160
إِن يَنصُرۡكُمُ ٱللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمۡۖ وَإِن يَخۡذُلۡكُمۡ فَمَن ذَا ٱلَّذِي يَنصُرُكُم مِّنۢ بَعۡدِهِۦۗ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Iny-yansurkumul laahu falaa ghaaliba lakum wa iny-yakhzulkum faman zal lazee yansurukum min ba'dih; wa 'alal laahi falyatawakkalil mu'minoon)

यदि अल्लाह तुम्हारी मदद करे, तो कोई भी तुम्हें पराजित नहीं कर सकता [360]। और यदि वह तुम्हें छोड़ दे, तो उसके बाद कौन है जो तुम्हारी मदद कर सके [361]? और मोमिनों को चाहिए कि वे केवल अल्लाह पर भरोसा रखें [362]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 160 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 160 की तफ़्सीर

 

✅ [360] अल्लाह की मदद सबसे ऊपर

अगर तुम अल्लाह की मदद चाहते हो, तो उस पर पूरा भरोसा रखो।
जब अल्लाह मदद करता है, तब चाहे सारी दुनिया दुश्मन बन जाए,
उसकी मदद तमाम रुकावटों पर भारी पड़ती है।
कोई ताक़त उस मोमिन पर ग़ालिब नहीं आ सकती,
जिसके साथ अल्लाह की नुसरत (मदद) शामिल होती है।

✅ [361] उसके सिवा कोई मददगार नहीं

इससे मुराद यह है कि अगर अल्लाह तअला किसी को ज़लील और बेसहारा कर दे,
तो फिर कोई भी उसे सहारा नहीं दे सकता।
ध्यान रहे कि यह अल्लाह की फ़ितरत नहीं है कि वह छोड़ दे,
बल्कि यह बंदे की नाफ़रमानी और बे-रुख़ी का नतीजा होता है।
जब अल्लाह की मदद छिन जाती है,
तो दुनिया की सारी ताक़तें भी मिलकर कुछ नहीं कर सकतीं।

✅ [362] अल्लाह पर सच्चा भरोसा कैसे हो

इस्लामी बुज़ुर्गों ने तवक्कुल (भरोसे) की तीन निशानियाँ बताई हैं:

  1. सिवा अल्लाह के किसी को मददगार न समझना
  2. रिज़्क़ का देने वाला सिर्फ अल्लाह को मानना
  3. इल्म और हिदायत का असली स्रोत केवल अल्लाह को मानना

ऐसा भरोसा इंसान को जन्नत में ऊँचे दर्जे तक पहुँचा देता है।

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