कुरान - 3:162 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

162
أَفَمَنِ ٱتَّبَعَ رِضۡوَٰنَ ٱللَّهِ كَمَنۢ بَآءَ بِسَخَطٖ مِّنَ ٱللَّهِ وَمَأۡوَىٰهُ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Afamanit taba'a Ridwaanal laahi kamam baaa'a bisakhatim minal laahi wa ma'waahu Jahannam; wa bi'sal maseer)

तो क्या वह व्यक्ति जो अल्लाह की रज़ा का पीछे करता है [367], उस जैसे हो सकता है जो अल्लाह का ग़ज़ब अपने ऊपर ले आता है [368], और जिसका ठिकाना जहन्नम है? और वह क्या ही बुरा ठिकाना है लौटने का। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 162 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 162 की तफ़्सीर

 

✅ [367] अल्लाह की रज़ा चाहने वाले लोग

इससे मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह की ख़ुशी हासिल करने के लिए कोशिश करते हैं,
जैसे कि मुहाजिरीन, अंसार और सच्चे मोमिन —
जिन्होंने सही अक़ीदा रखा और नेक अमल किए,
और सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए सब कुछ किया।
इनका अंजाम बहुत उम्दा होगा, और आख़िरत में उनका दर्जा बहुत ऊँचा होगा।

✅ [368] अल्लाह का ग़ज़ब कमाने वाले लोग

यह इशारा है मुनाफिक़ों और काफ़िरों की तरफ़,
जिन्होंने झूठ, इनकार और दोहरी ज़िंदगी जी कर अल्लाह की नाराज़गी हासिल की।
ये लोग सच्चे मोमिनों के बराबर नहीं हो सकते।
इनका अंजाम है जहन्नम,
जो कि बहुत ही बुरा ठिकाना है लौटने का —
और यह उनके अपने ही बुरे अमाल का नतीजा है।

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