कुरान - 3:163 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

163
هُمۡ دَرَجَٰتٌ عِندَ ٱللَّهِۗ وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Hum darajaatun 'indal laah; wallaahu baseerum bimaa ya'maloon)

तो क्या वह जो अल्लाह की रज़ा का तालिब है [367], उस जैसे हो सकता है जो अल्लाह का ग़ज़ब अपने ऊपर ले आया [368], और जिसका ठिकाना जहन्नम है? और वह क्या ही बुरा है लौटने का ठिकाना। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 163 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 162 की तफ़्सीर

 

✅ [367] अल्लाह की रज़ा चाहने वाले

इससे मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह की ख़ुशी पाने के लिए मेहनत करते हैं,
जैसे — मुहाजिरीन, अंसार, और सच्चे मोमिन,
जिनका अक़ीदा सही होता है और जो नेक अमल सिर्फ अल्लाह के लिए करते हैं।
इन लोगों का अंत इज़्ज़त और कामयाबी वाला होता है,
और आख़िरत में उनका मुक़ाम बहुत ऊँचा होगा।

✅ [368] अल्लाह का ग़ज़ब कमाने वाले

यह इशारा है मुनाफिक़ों और काफ़िरों की तरफ़ —
जिन्होंने झूठ, इनकार और दोहरी ज़िंदगी के जरिए अल्लाह की नाराज़गी कमाई।
ये लोग मोमिनों के बराबर नहीं हो सकते।
इनका ठिकाना है जहन्नम,
और वह बहुत ही बुरा स्थान है लौटने का,
जो कि उनके अपने बुरे कर्मों का अंजाम है।

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