Transliteration: (Awa lammaaa asaabatkum museebatun qad asabtum mislaihaa qultum annaa haazaa qul huwa min 'indi anfusikum; innal laaha 'alaa kulli shai'in Qadeer)
यहाँ "दुगनी" से मुराद है:
अगर उहुद की जंग में 70 मुसलमान शहीद हुए,
तो उससे पहले बद्र की जंग में मुसलमानों ने 70 काफ़िरों को कत्ल किया था और 70 को क़ैद किया था —
यानि दुगनी चोट दुश्मन को पहुँचा चुके थे।
इस आयत में मुसलमानों को याद दिलाया गया कि:
जब इतनी बड़ी शिकस्त के बावजूद काफ़िरों ने अगले साल बदला लेने की हिम्मत की,
तो तुम क्यों एक अस्थाई हार से हिम्मत हार बैठे?
इससे हमें यह सीख मिलती है कि:
गुज़री हुई फ़तहों और बहादुरी की यादें
ईमान वालों में नए जोश और हौसले को जगाने का ज़रिया बनती हैं।
क़ुरआन में "हर चीज़ पर क़ादिर है" का मतलब हर जगह अलग-अलग सियाक़ (context) में होता है:
इसलिए इस आयत का यह मतलब निकालना कि अल्लाह झूठ बोल सकता है —
यह निहायत ग़लत और गुमराह करने वाली बात है।
झूठ अल्लाह की पाक ज़ात के लिए नामुमकिन है,
क्योंकि वह कमज़ोरी और नापाकी की अलामत है,
जबकि अल्लाह हर ऐब से पाक है।
(तफ़्सीर नयीमी देखें विस्तार के लिए)
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