कुरान - 3:51 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
إِنَّ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمۡ فَٱعۡبُدُوهُۚ هَٰذَا صِرَٰطٞ مُّسۡتَقِيمٞ

Transliteration: (Innal laaha Rabbee wa Rabbukum fa'budooh; haazaa Siraatum Mustaqeem)

बेशक अल्लाह मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब। बस उसी की इबादत करो [113]। यही सीधी राह है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले-इमरान – आयत 51 की तफ़्सीर

 

✅ [113] मोज़ज़ात का मतलब ख़ुदाई नहीं होता

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने साफ़ ऐलान किया कि:
“अल्लाह मेरा भी रब है और तुम्हारा भी।”
इससे यह हक़ीक़त वाज़ेह हो गई कि:

  • चाहे उनके पास मोज़ज़ात (चमत्कार) और इल्म-ए-ग़ैब हो,
  • फिर भी वह अल्लाह के बंदे हैं, खुदा नहीं।

इससे कुछ अहम बातें साबित होती हैं:

  • पैग़म्बरों और औलिया के मोज़ज़ात पर ईमान लाना शिर्क नहीं है।
  • मोज़ज़ात और करामात देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है, और वे सिर्फ़ उसके हुक्म से होते हैं।
  • खुद हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने कभी ख़ुदाई का दावा नहीं किया, बल्कि हमेशा अल्लाह की बंदगी और तौहीद की दावत दी।

यह आयत उन ग़लतफ़हमियों और ग़लत फ़तवों का भी ख़ंड़न है जो कुछ शिद्दती गिरोहों द्वारा दिए जाते हैं, जो औलिया के करामात को शिर्क कह देते हैं।
सीधी राह वही है — अल्लाह की बंदगी, और उसके चुने हुए बंदों का अदब, बिना ग़ुलू (अति) के।

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