कुरान - 3:86 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
كَيۡفَ يَهۡدِي ٱللَّهُ قَوۡمٗا كَفَرُواْ بَعۡدَ إِيمَٰنِهِمۡ وَشَهِدُوٓاْ أَنَّ ٱلرَّسُولَ حَقّٞ وَجَآءَهُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُۚ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Kaifa yahdil laahu qawman kafaroo ba'da eemaanihim wa shahidooo annar Rasoola haqqunw wa jaaa'ahumul baiyinaat; wallaahu laa yahdil qawmaz zaalimeen)

अल्लाह ऐसी क़ौम को कैसे हिदायत दे जिसने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया, हालांकि वे गवाही दे चुके थे कि रसूल सच्चे हैं और उनके पास खुली निशानियां आ चुकी थीं; और अल्लाह ज़ालिम लोगों को हिदायत नहीं देता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 86

✅ इर्तदाद और ज़ुल्म का अंजाम

हक़ की वाज़ेह निशानियां देखने और गवाही देने के बाद जो लोग जान-बूझकर कुफ़्र इख़्तियार करते हैं, वे अपनी हिदायत के दरवाज़े ख़ुद बंद कर लेते हैं।

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