कुरान - 82:17 सूरह अल-इन्फितार अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ

Transliteration: (Wa maaa adraaka maa Yawmud Deen )

17. तुम्हें क्या पता है कि बदला का दिन [13] क्या है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इन्फितार आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

क़ियामत के दिन की हकीकत (The Reality of the Day of Judgment) – आयत 82:17 की तफ़सीर (Commentary of the Verse 82:17)

"तुम्हें क्या मालूम क़ियामत के दिन के बारे में?"

क़ियामत के दिन का भयावह सत्य (The Incomprehensible Terror of the Day of Judgment)

इंसान का दिमाग इसे पूरी तरह से नहीं समझ सकता (The Human Mind Cannot Fully Grasp It) – यह आयत यह बताती है कि चाहे कोई कितना भी ग़ौर करें, वह क़ियामत के दिन के असली भय और खौफ़ को पूरी तरह से समझ नहीं सकता।

नबी ﷺ के लिए एक संदेश (A Message to the Prophet ﷺ) – कुछ आलिम इस आयत को नबी ﷺ के लिए एक संदेश मानते हैं, यानी कि सबसे ज़्यादा समझदार और बुद्धिमान शख्स भी केवल अपनी सोच से क़ियामत के दिन के असल रूप को नहीं समझ सकता। यह चीज़ अल्लाह ने नबी ﷺ को वाही (अवधि) के ज़रिए बताई है।

नबी ﷺ का ग़ैब का इल्म (The Prophet’s Knowledge of the Unseen) – नबी ﷺ को क़ियामत के दिन के बारे में वह इल्म दिया गया था जो अल्लाह ने वाही और मीराज की रात में उनके सामने दिखाई थी।

नबी ﷺ की नज़र हर चीज़ पर (The Prophet ﷺ Sees Everything) – यह याद रखना चाहिए कि नबी ﷺ की नज़र में बीते हुए, आने वाले और वर्तमान सभी चीज़ें शामिल हैं, साथ ही वह ग़ैबी (अदृश्य) चीज़ों को भी देख सकते थे। उनकी नज़र इंसानों की तरह सीमित नहीं थी।

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