Transliteration: (Yawma laa tamliku nafsul linafsin shai'anw walamru yawma'izil lillaah )
"(वह दिन होगा) जब कोई भी किसी की मदद करने की ताकत नहीं रखेगा। और उस दिन पूरी हुकूमत सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में होगी।"
काफ़िर किसी के लिए शफ़ा'at नहीं कर पाएंगे (No Infidel Will Be Able to Intercede) – यह आयत यह साफ करती है कि काफ़िरों को किसी के लिए भी शफ़ा'at (मुलाहिज़ा या सिफारिश) करने की कोई ताकत नहीं होगी।
मुमिन काफ़िरों की मदद नहीं कर सकेंगे (Believers Cannot Help Disbelievers) – इस दिन, कोई भी मुमिन काफ़िरों की मदद नहीं कर सकेगा या उनकी ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शफ़ा'at बिल्कुल नहीं होगी। शफ़ा'at अल्लाह की अनुमति से ही होगी।
नबी ﷺ शफ़ा'at करने वाले हैं, हुक्म देने वाले नहीं (Prophets as Intercessors, Not Commanders) – हुक्म देने का अधिकार केवल अल्लाह के पास है। नबी और रसूल शफ़ा'at करने वाले होंगे, जैसे वकील और गवाह अपना केस पेश करते हैं, लेकिन वे फैसला नहीं सुनाते।
उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की ही हुकूमत होगी (No Authority Except Allah on That Day) – इस दुनिया में कुछ लोग प्रतीकात्मक रूप से हुकूमत रखते हैं, चाहे वह बाहर से (सरकारें, शासक) हों या अंदर से (आध्यात्मिक नेता)। लेकिन क़ियामत के दिन, कोई भी व्यक्ति — चाहे वह प्रतीकात्मक रूप से हो या किसी अन्य रूप में — अल्लाह के अलावा किसी भी तरह की हुकूमत नहीं रखेगा।
अच्छे आमाल करने की तलब (A Warning to Do Good Deeds) – चूंकि उस दिन सारी हुकूमत सिर्फ़ अल्लाह के पास होगी, यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें उस दिन के लिए अच्छे आमाल करने चाहिए और अल्लाह की रहम की तलाश करनी चाहिए।
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