कुरान - 17:44 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
تُسَبِّحُ لَهُ ٱلسَّمَٰوَٰتُ ٱلسَّبۡعُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهِنَّۚ وَإِن مِّن شَيۡءٍ إِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمۡدِهِۦ وَلَٰكِن لَّا تَفۡقَهُونَ تَسۡبِيحَهُمۡۚ إِنَّهُۥ كَانَ حَلِيمًا غَفُورٗا

Transliteration: (Tusabbihu lahus samaawaatus sab'u wal ardu wa man feehinn; wa im min shai'in illaa yusabbihu bihamdihee wa laakil laa tafqahoona tasbeehahum; innahoo kaana Haleeman Ghafooraa)

सातों आकाश और धरती और जो कोई भी उनमें है, सब उसकी पवित्रता का गुणगान (तस्बीह) करते हैं; और कोई भी ऐसी वस्तु नहीं जो उसकी प्रशंसा के साथ उसकी तस्बीह न करती हो, परन्तु तुम उनकी तस्बीह को नहीं समझते। निश्चय ही वह बड़ा सहनशील, बहुत क्षमा करने वाला (हलीम व ग़फ़ूर) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 44 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कायनात के प्रत्येक कण की तस्बीह

पेड़, पौधे, पत्थर, पहाड़, पानी, पशु-पक्षी और सूक्ष्म परमाणु—कायनात की हर चीज़ अपनी-अपनी ज़बान में अल्लाह की हम्द व तस्बीह कर रही है। इंसान उनकी भाषा को भले न समझ सके, मगर सारा ब्रह्मांड अल्लाह की इबादत में लीन है।

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