कुरान - 17:111 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
وَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي لَمۡ يَتَّخِذۡ وَلَدٗا وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ شَرِيكٞ فِي ٱلۡمُلۡكِ وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ وَلِيّٞ مِّنَ ٱلذُّلِّۖ وَكَبِّرۡهُ تَكۡبِيرَۢا

Transliteration: (Wa qulil hamdu lillaahil lazee lam yattakhiz waladanw wa lam yakul lahoo shareekun fil mulki wa lam yakul lahoo waliyyum minaz zulli wa kabbirhu takbeeraa (section 12))

और कह दीजिए कि 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं जिसने न तो किसी को अपना बेटा बनाया, और न बादशाही में उसका कोई साझीदार है, और न आजिज़ होने की वजह से उसका कोई मददगार है; और उसकी बड़ाई बयान कीजिए जैसी बड़ाई बयान करने का हक़ है!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 111

✅ तौहीद-ए-ख़ालिस, शिर्क की मुकम्मल नफ़ी और अल्लाह की किबरियाई

यह सूरह बनी इस्राईल की आख़िरी और निहायत अज़ीम आयत है जिसे 'आयतुल इज़्ज़' (इज़्ज़त वाली आयत) भी कहा जाता है। इसमें हर क़िस्म के शिर्क की नफ़ी की गई: औलाद से पाक होना (ईसाइयों व यहूदियों के अक़ीदे का रद्द), हुकूमत में किसी साझीदार का न होना (मुशरिकीन का रद्द), और किसी मदद या हिमायती का मोहताज न होना। सिर्फ़ अल्लाह ही तमाम इज़्ज़त, हम्द और किबरियाई का तन्हा हक़दार है।

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