कुरान - 17:107 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
قُلۡ ءَامِنُواْ بِهِۦٓ أَوۡ لَا تُؤۡمِنُوٓاْۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ مِن قَبۡلِهِۦٓ إِذَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ يَخِرُّونَۤ لِلۡأَذۡقَانِۤ سُجَّدٗاۤ

Transliteration: (Qul aaminoo biheee aw laa tu'minoo; innal lazeena ootul 'ilma min qabliheee izaa yutlaa 'alaihim yakhirroona lil azqaani sujjadaa)

कह दीजिए कि 'तुम इस पर ईमान लाओ या न लाओ; बेशक जिन लोगों को इससे पहले इल्म दिया गया था, जब यह उनके सामने पढ़ा जाता है तो वे ठोड़ियों के बल सजदे में गिर पड़ते हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 107

✅ अहले इल्म की आजिज़ी और कलाम-ए-इलाही के आगे सजदारिज़ाई

जो लोग आसमानी किताबों के सच्चे आलिम थे और हक़ की पहचान रखते थे (जैसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम और ईसाई राहिब), वे जब क़ुरआन की आयतें सुनते हैं तो कलाम की अज़मत और रूहानियत से मुतास्सिर होकर रोते हुए अल्लाह के हुज़ूर सजदे में गिर पड़ते हैं।

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