कुरान - 17:106 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

106
وَقُرۡءَانٗا فَرَقۡنَٰهُ لِتَقۡرَأَهُۥ عَلَى ٱلنَّاسِ عَلَىٰ مُكۡثٖ وَنَزَّلۡنَٰهُ تَنزِيلٗا

Transliteration: (Wa quraanan faraqnaahu litaqra ahoo 'alan naasi 'alaa muksinw wa nazzalnaahu tanzeelaa)

और हमने क़ुरआन को थोड़ा-थोड़ा करके जुदा रखा ताकि आप इसे ठहर-ठहर कर लोगों को सुनाएं, और हमने इसे ब-तदरीज (वक़्फ़े-वक़्फ़े से) नाज़िल किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 106 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 106

✅ क़ुरआन का ब-तदरीज (थोड़ा-थोड़ा) नुज़ूल और उसकी हिकमत

क़ुरआन मजीद पिछली आसमानी किताबों की तरह एक ही बार में नहीं उतारा गया, बल्कि 23 साल के अरसे में हालात और ज़रूरतों के मुताबिक़ थोड़ा-थोड़ा करके नाज़िल हुआ। इसका मक़सद यह था कि लोग इसके एहकाम को अच्छी तरह समझें, दिलों में उतारें और अमली ज़िन्दगी में धीरे-धीरे लागू कर सकें।

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