कुरान - 17:105 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
وَبِٱلۡحَقِّ أَنزَلۡنَٰهُ وَبِٱلۡحَقِّ نَزَلَۗ وَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ إِلَّا مُبَشِّرٗا وَنَذِيرٗا

Transliteration: (Wa bilhaqqi anzalnaahu wa bilhaqqi nazal; wa maaa arsalnaaka illaa mubash shiranw wa nazeeraa)

और हमने इस (क़ुरआन) को हक़ के साथ नाज़िल किया और यह हक़ ही के साथ नाज़िल हुआ; और (ऐ नबी!) हमने आपको सिर्फ़ ख़ुशख़बरी सुनाने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 105

✅ क़ुरआन की हक़्क़ानियत और नबी-ए-रहमत की रिसालत

क़ुरआन मजीद अल्लाह की बारगाह से सच्चाई, इंसाफ़ और हिकमत के साथ नाज़िल हुआ है और इसमें किसी बातिल या मिलावट का कोई दख़ल नहीं हो सकता। नबी करीम (ﷺ) का मन्सब यह है कि आप ईमान वालों को जन्नत की बशारत दें और नाफ़रमानों को अल्लाह के अज़ाब से आगाह फ़रमाएं।

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