Transliteration: (Wa bilhaqqi anzalnaahu wa bilhaqqi nazal; wa maaa arsalnaaka illaa mubash shiranw wa nazeeraa)
क़ुरआन मजीद अल्लाह की बारगाह से सच्चाई, इंसाफ़ और हिकमत के साथ नाज़िल हुआ है और इसमें किसी बातिल या मिलावट का कोई दख़ल नहीं हो सकता। नबी करीम (ﷺ) का मन्सब यह है कि आप ईमान वालों को जन्नत की बशारत दें और नाफ़रमानों को अल्लाह के अज़ाब से आगाह फ़रमाएं।
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