कुरान - 17:110 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
قُلِ ٱدۡعُواْ ٱللَّهَ أَوِ ٱدۡعُواْ ٱلرَّحۡمَٰنَۖ أَيّٗا مَّا تَدۡعُواْ فَلَهُ ٱلۡأَسۡمَآءُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَلَا تَجۡهَرۡ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتۡ بِهَا وَٱبۡتَغِ بَيۡنَ ذَٰلِكَ سَبِيلٗا

Transliteration: (Qulid'ul laaha awid'ur Rahmaana ayyam maa tad'oo falahul asmaaa'ul Husnaa; wa laa tajhar bi Salaatika wa laa tukhaafit bihaa wabtaghi baina zaalika sabeela)

कह दीजिए कि 'चाहे तुम अल्लाह कहकर पुकारो या अर-रहमान कहकर पुकारो, जिस नाम से भी पुकारो, तमाम बेहतरीन नाम उसी के हैं।' और अपनी नमाज़ न बहुत बुलंद आवाज़ से पढ़िए और न बिल्कुल आहिस्ता, बल्कि इन दोनों के बीच का रास्ता इख़्तियार कीजिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 110

✅ अस्माउल हुस्ना (अल्लाह के प्यारे नाम) और नमाज़ में क़िराअत का एतिदाल

मुशरिकीन एतराज़ करते थे कि आप कभी 'अल्लाह' कहते हैं और कभी 'रहमान', क्या दो ख़ुदा हैं? अल्लाह ने फ़रमाया कि अल्लाह और रहमान एक ही माबूद के प्यारे और सिफ़ाती नाम हैं, तमाम बेहतरीन नाम उसी के हैं। साथ ही नमाज़ में क़िराअत का अदब सिखाया गया कि न इतनी ऊंची आवाज़ हो कि काफ़िर मज़ाक़ उड़ाएं, और न इतनी धीमी कि पीछे वाले सुन न सकें, बल्कि मध्यम और मोअतदिल आवाज़ हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now